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Wednesday, 14 January 2026

मोजर बेयर प्लांट के राखड़ वाहनों ने छलनी की सड़कें, मरम्मत के नाम पर केवल 'लीपापोती'

 भ्रष्टाचार की राख में दबी जनता की सुध कौन लेगा?



मोजर बेयर प्लांट के राखड़ वाहनों ने छलनी की सड़कें, मरम्मत के नाम पर केवल 'लीपापोती'

संस्कार गौतम

अनूपपुर/कोतमा: हिंदुस्तान पावर प्लांट (मोजर बेयर) द्वारा उत्सर्जित राखड़ का परिवहन अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है। राखड़ से लदे ओवरलोड वाहनों ने क्षेत्र की सड़कों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया है। विडंबना यह है कि प्रशासन और कंपनी द्वारा इस नुकसान की भरपाई के नाम पर जो मरम्मत कार्य किया जा रहा है, वह भ्रष्टाचार और औपचारिकता की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।

सड़कों का बुरा हाल, गिनती से बाहर हुए गड्ढे

भालूमाड़ा से कोतमा और कोतमा से पसान को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही हैं। भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही से सड़कों पर इतने गड्ढे हो चुके हैं कि अब उनकी गिनती करना भी संभव नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मोजर बेयर कंपनी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय बंद खदानों को राखड़ से पाटने में जुटी है, जिससे न केवल सड़कें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि राखड़ युक्त जहरीली हवा लोगों के फेफड़ों में जहर घोल रही है।

2800 मीटर का निर्माण: 'ऊँट के मुँह में जीरा'

सड़कों की जर्जर हालत को देखते हुए हाल ही में लगभग 2800 मीटर की सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। लेकिन इसे 'निर्माण' कहना विकास का मजाक उड़ाने जैसा है। जनता का आरोप है कि यह 100 रुपये का नुकसान कर 10 रुपये का मरहम लगाने जैसा है। जहाँ राखड़ वाहक गुजरते हैं, वहाँ हर इंच सड़क जर्जर हो चुकी है, लेकिन महज कुछ मीटर का टुकड़ा बनवाकर प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है। इसे क्षेत्र के लोग भ्रष्टाचार के गड्ढों पर 'बैंडेज' लगाने जैसी कवायद मान रहे हैं।

बदरा और हर्रद में 'लिपा-पोती' का खेल

सड़क मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल बदरा और हर्रद जैसे इलाकों में भी जारी है। यहाँ गड्ढों को व्यवस्थित तरीके से भरने के बजाय सीमेंट, गिट्टी और रेत की एक पतली परत चढ़ाकर सड़कों को 'ओढ़ा' दिया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो यह अस्थायी काम पहली बारिश या कुछ दिनों के भारी यातायात में ही उखड़ जाएगा।




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